#Kavita by Arun Kumar Arya

माँ भारत का बेटा

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धरती हमारी माँ हम सब इसकी संतान

काम आये जो देश के, बन्दा वही महान

जन्में हम सब यहीं, इससे हमारा नाता

पूज्य है माँ,बेटा सदा उसका गुण गाता

 

हिमालय का आँगन देश हमारा भारत

पर्वत-शिखर झुक करते इसको प्रणाम

नित बहती गंगा, जमुना, सिन्धु, रावी

ब्रह्मपुत्र की धारा का करते  गुणगान।

 

विन्ध्य, सतपुड़ा, अरावली, नीलगिरि

मेखला बन करते  इसका सब श्रृंगार

सागर बंगाल की खाड़ी , अरब, हिन्द

लहरों से करते जिसका चरण पखार।

 

सदाबहार वनों का देश हमारा भारत

नदियोँ का जाल बिछे यहाँ दिखते हैं

सम्पदा इसके गर्भ में हैं अनेकअनेक

मूँगा, मोती सागर में इसके मिलते हैं

 

सभ्यता इसकी अति प्राचीन विश्व में

संस्कृति इसकी पुरातन अति महान

ऋषि, मुनि, सन्यासी,योगी, संत,साधु

यहीं से ले गये देश देश  ज्ञान विज्ञान

 

स्वर्ग देवता जन्म लेने को  तैयार यहाँ

मिला ईश्वर से इस धरती को वरदान

बेटे हैं भारत माँ के हम सब प्राणी जन

प्रहरी बन खड़े,बचाने को इसकी शान

 

सपूत हुए दानी, वीर, ज्ञानी,योद्धा यहाँ

कपिल, कणाद, गौतम,पतंजलि विद्वान

भरत,रघु राम,कृष्ण,भीष्म,चन्द्र का तेज

हरिश्चन्द्र,कर्ण,हर्ष,भामाशाह का दान।

 

धन्य हैं बेटे मंगल,आज़ाद,भगत,सुभाष

सावरकर, बिस्मिल्, सुखदेव, खुदीराम

कूद पड़ी युद्ध में रणचण्डी बन बेटियाँ

सारन्धा, दुर्गा, लक्ष्मी,अहिल्या महान

 

अलख जगाये आज़ादी का फूँक मन्त्र

दयानंद,श्रद्धानंद,तिलक,गोखले,गाँधी

आगे आये मरने को अनगिनत युवक

पाने को आजादीआयी भयंकर आँधी।

 

साराभाई,सतीश, रमन, भाभा, कलाम

विश्व में अपनी यशस्वी पहचान बनाये

सरोजनी, महादेवी, सुभद्रा का जलवा

इन्दिरा की शक्ति को सब ने अजमाये

 

भारतपुत्र हम, सदा इसका मान बढ़ायें

रक्षा,विकास में बच्चा बच्चा लग जायें

आये कोई शत्रु बन विनाश को इसके

मारने मरने को तुरन्त आगे बढ़ जायें।

 

भारत में न रही कभी सपूतों की कमी

वलिदानों की है इसके अगणित गाथा

आर्य”इसके विकास में काम आने वाले

रक्षक को प्रेम से झुकाता अपना माथा

 

अरुण कुमार “आर्य ”

पंडित दीनदयाल नगर

मुग़ल सराय चंदौली

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