#Kavita by Arun Kumar Arya

आजादी के दिवाने

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तलवारें चमक उठी थी चित्तौड़ में

मुण्ड गिरे राजपूताने की माटी में

राणा का चेतक तूफान बन दौड़ा

श्याम नारायण की हल्दी घाटी में

 

ललकारा था सीना तान छत्रसाल

कवि भूषण ने महिमा बखानी थी

सुभद्रा ने खींच ऐसी लगायी लगाम

खूब लड़ी मर्दानी झाँसी वाली रानी थी

 

फूँका मंत्र स्वतंत्रता का दयानंद ने

सत्यार्थ प्रकाश में स्वराज्य दिखाया

स्वतंत्रता हमारा जन्म सिद्ध  अधिकार

तिलक ने महाराष्ट्र से नारा लगाया

 

माखन लाल चतुर्वेदी की लेखनी

चल पड़ी लिखने वीरता की कहानी

राम नरेश त्रिपाठी को कोई कैसे भूलें

मुर्दे देशवासियों में भरी जिसने जवानी

 

जागे फिर एक बार कह जगाया

कविवर सूर्यकांत त्रिपाठी निराला

भारत भारती लिखने पर मैथिली को

अंग्रेजों ने उन्हें कारागार में डाला

 

शरतचंद्र,वंकिमचमद्र को देखो

के पी जायसवाल ने लिखा इतिहास

सन्न रह गयी देख दुनिया सारी

कैसे करें अब भारतियों का उपहास.

 

द्विवेदी की सरस्वती,बाल मुकुंद की लिबर्टी

श्याम जी वर्मा की इण्डियन सोशलिस्ट

बिस्मिल की सरफरोशी की तमन्ना

छद्म वेश में भगत सिंह बने जर्नलिस्ट

 

बहुत बहुत जगाये लेखनी से अपने

उठो युवाओं देश को आजाद करो

आर्य साहित्यकार है जीव जग का ऐसा

सभी देश वासी मिल धन्यवाद करो।

 

अरुण कुमार आर्य

प्रधान

आर्य समाज मन्दिर

मुगल सराय ,चंदौली

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