#Kavita by Arun Kumar Arya

धरा का प्रश्न
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प्रश्न पूछती धरा अपने प्रिय पुत्रों से
धरती पर तुम किस लिए आये हो ?
खाने पीने सोने में बितायी जिन्दगी
मौजों में इसे फालतू ही गँवाए हो।

धरा करती है उसी जन को याद
उसके हित के लिए जो आगे आते
कतरा कतरा खून का विखेरने में
तनिक भी नहीं जो मृत्यु से घबराते।

आना जाना तो है धंधा जिन्दगी का
आने जाने का जग से रिश्ता पुराना
आये हैं सो जाएंगे अवश्य यहाँ से
बताओ न जाने का है कोई बहाना ?

जब जाना है तो कुछ कर जाओ
कर्म की ही पूजा करता विश्व सारा
जननी जन्मभूमि स्वर्ग से है महान
कैसे न बहाओगे उस हेतु रक्तसारा ?

सीधा जाता कैवल्य धाम वो प्राणी
देश हित देते जो लोग अपनी जान
अरबो खरबो मर कर गए यहाँ से
क्यों नहीं बना पाए अपनी पहचान ?

धरा देती सब कुछ अपना निष्पक्ष
कौन बन्दा होता उसका प्रिय संतान ?
वो लोग ही होते उसके सबसे प्रिय
धरा के सीने पर खींचते जो निशान।

अन्न ,जल,वायु उस धरा से मिलती
पंच महाभूतों से बना है जग सारा
विलिन होना है जब इसको उसी में
अर्पण कर काया क्यों न बने प्यारा ?

कब आएगी समझ तूझे पृथ्वी पुत्रों
कब तक जकड़े रहेगा भोग विलास
आर्य”देश हित लगाया जो अपने को
रचे गये उसी का यहाँ पर इतिहास।

अरुण कुमार आर्य
पं०दीन दयाल उपाध्याय नगर
चन्दौली।

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