#Kavita by Arun Kumar Yadav

एक बार लीजै अवतार प्रभु

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एक बार लीजै अवतार प्रभु ।

बढ़ रहा है अत्याचार प्रभु ।।

 

हर बंश में कंस का वास हुआ ।

सभ्यता का सत्यानाश हुआ ।।

जन – मन में प्रेम बढ़े कैसे ,

मोह- माया में लोग पड़े ऐसे ,

सबका दिल है तार-तार प्रभु  ।

एक बार लीजै अवतार प्रभु ।।

———- 2 ———

वाह- वाही लिए अधिकारी मस्त ।

कर्मचारी अपने विभाग में पस्त ।।

सत – पथ पर जो भी बढ़ा आगे ,

थक गया देख भ्रष्टाचार प्रभु ।

एक बार लीजै अवतार प्रभु ।।

———3———–

न मानवता न वात्सल्य यहां ।

छल – कपट भरा मांगल्य यहां ।।

स्वारथ से सब रिश्ते नाते ,

मिलता नही स्नेहिल प्यार प्रभु ।

एक बार लीजै अवतार प्रभु ।।

——— 4 ———–

हर चीज मिलावट से है बनी ।

शुद्धता का ब्राण्ड लिए कम्पनी ।।

महगाई बनी डायन पूतना ,

डर- डर जीने को लाचार प्रभु ।

एक बार लीजै अवतार प्रभु ।।

——— 5 ———

लोभी सत्ता के , सब ही नेता ।

जनता की खबर कोई नही लेता ।।

धृतराष्ट्र – प्रेम में डूबे सब ,

हुआ सारा तन्त्र बीमार प्रभु ।

एक बार लीजै अवतार प्रभु ।।

———- 6 ———–

जरासन्धि सदृश है चीन खड़ा ।

शिशुपाल बना पाकिस्तान अड़ा ।।

भारत- माँ निहारती राह तेरी ,

दुश्मन का कर संहार प्रभु ।

एक बार लीजै अवतार प्रभु ।।

————7———–

मैली पावन यमुना,गंगा ।

हर और बढ़ रहा है दंगा ।।

लाज तुम्हारे हाथ गोविन्द ,

“अरुण” नैया है मझधार प्रभु

तू ही कर बेड़ा पार प्रभु ।

लीजै फिर अवतार प्रभु ।।

एक बार लीजै अवतार प्रभु

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रचनाकार …………….

अरुण कुमार यादव

पू0मा0वि0 बरसठी

जौनपुर ।

मो0..9598444853

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