Kavita By Arun Kumar Yadav

होली है । 🌈
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दिलों में प्रेम जब आये
समझ लेना कि होली है ।
मौसम में खुशियां जब छाये
समझ लेना कि होली है ।।
समझना रंगों की भाषा
समझना उनकी अभिलाषा
गुलाबी जब गाल हो जाये
समझ लेना कि होली है ।
दिलों में प्रेम जब आये
समझ लेना कि होली है ।।

प्रीत बनकर प्रकृति पीला
कृष्ण बनकर नेह नीला
लालिमा लाली राधा जब बन जाये
समझ लेना कि होली है ।
दिलो में प्रेम जब आये
समझ लेना कि होली है ।।

भरा हो हर्ष बनकर हरा
हो चुनर ओढ़े धानी धरा
फाग बन प्रकृति जब ‘अरुण ‘भाये
समझ लेना कि होली है ।
दिलों में प्रेम जब आये
समझ लेना कि होली है ।।

दूर हो सब गिला शिकवा
भांग की मस्ती घोले हवा
मगन मन अल्हड़ गीत जब गाये
समझ लेना कि होली है ।
दिलों में प्रेम जब छाये
समझ लेना कि होली है ।।

चले पिचकारी की धार
प्यार की हो सदा बौछार
दुश्मन भी जब गले मिल जाये
समझ लेना कि होली है ।
दिलों में प्रेम जब आये
समझ लेना कि होली है ।।

हो चाहत से भरी झोली
मुबारक हो सबको होली
महक बोली में गुझियों की आये
समझ लेना कि होली है ।
दिलों में प्रेम जब छाये
समझ लेना कि होली है ।।

जवानों के दम पर होली
गूंजे जय हिंद की बोली
सीमाओं पर तिरंगा जब लहराये
समझ लेना कि होली है ।
दिलों में प्रेम जब आये
समझ लेना कि होली है ।।

डरना रंग बदलने वालों से
डरना काले दिलवालों से
दिलों के नफरत जब जल जाये
समझ लेना कि होली है ।
दिलों में प्रेम जब आये
समझ लेना कि होली है ।।
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रचना —-
अरुण कुमार यादव
पू0 मा0 वि0 बरसठी , जौनपुर ।।
मो0 9598444853

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