#Kavita by Ashish Mishra

पॉलिटिक्स

 

जहिया से भेलों हम बच्चा के बाप

तखेन बुझलों जे ठीके एकरा सम्हारनै बाप रौ बाप,

मुँह से लेर चुबैते रहलों

बिन पैन के सब गोटा के नहैते रहलौं!

 

बच्चा के मुँह जे आगू देखा जाइए

क्रांति सबता पाछू ढुइक जाईये,

दिन में सुतनै राइत में जगोनाई

एकरा नई आगा या पाछू कोनो गप्प माननाई!

 

पहिने उलटनाई फेर घूसकनाई,

घुसकुनिया दैत ठारो होइ के कोसिस केनाइ,

पेट भरला पर मसखरी करती,

खाली पेट भेला पर पूरा घरे माथ पर उठौति!

 

बउवा,नूनू सुग्गा, राजा कहु या बुच्ची,

सब घरक भेटत एहने सबहक बच्चा खुरलूच्ची,

आई हमर त कैल ई अहा के खिस्सा

दियौ आशीष जे सब घरक रहै एहने दनदनाइत बच्चा!!

बच्चा स्पेशल

 

 

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