#Kavita by Ashish Tiwari ‘ Jugnu’

दार,भात,कढ़ी, बरा, मुगउरा भईया के ससुरारी मा !
छानय रात दिना सोहगउरा भईया के ससुरारी मा !!

सारी, सरहज हाथ से अपने सासू खूब खबामय,
चिनी, सोहारी अउर सेठउरा भईया के ससुरारी मा !!

संकोचन म खाईन दादू पानी पी पी घुटकी भर,
पेट ससू होइगा उपड़उरा भईया के ससुरारी मा !!

जब उनही बईठे कित्तूजूँन एकान्ते मा पामय,
भागय बिटिये डार महउरा भईया के ससुरारी मा !!

गेंहू, चाउर, दार, बरी कुछ कपड़ा लत्ता लाद दिहिन,
चलत चलावत टूट पखउरा भईया के ससुरारी मा !!

-आशीष तिवारी जुगनू  8871887126
टिकुरी पावनधाम मंदिर रीवा

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