#Kavita by Ashok Jaiswal

बंशी के काँटे में लगा, केंचुआ यूँ बोला मछली से,

मैं तो मरा तेरे लिये, अब तू तो ना मर मेरे लिये !!

 

मान ले मेरा कहना तू, धोखाधड़ी है इसमें भारी,

टपकाएगी लार मेरे लिये, बाहर बैठा है तेरे लिये !!

 

ये जिंदगी के मेले व झमेले, खत्म कभी न होंगे,

हम ही ख़त्म हो लेंगे, ‘ताम~झाम’ किसके लिये !!

 

लालच शै बुरी बहुत है, कर देता है सब कुछ नाश,

याद दिल में बनी रहे, हर पल अपने रब के लिये !!

 

कुछ साथ लिये ना आये, ना कुछ लेकर जाना है,

पाई~पाई जोड़ रहा, किसकी खातिर कबके लिये !!

 

मायाठगिनी नित ठगे, सँसार के सभी ठग्गुओं को,

हँसी आती है उन पर, रोता कोई ना ठग के लिये !!

 

अपनों के लिये तो सभी, जियेंगे और मर जायेंगे,

जीना तो उसी का जीना है, जो जिये सबके लिये !!

 

जिन्हें हम कहते अपना, मरण उपरांत भुला देंगे,

इस दुनिया में मरेगा कोई, तेरे लिये न मेरे लिये !!

 

याद किसीको रक्खे कौन, दुनिया में मरने के बाद,

दिलों में याद रह जायेगा, जो जिये जग के लिये !!

 

जीवन कर्म की खेती है, भरोसा करो एक उसीका,

बैठा है ‘जो’ एक रूपेण, सबके भीतर सबके लिये !!

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