#Kavita by Ashutosh Anand Dubey

परशुराम जन्मोत्सव पर सभी ब्राह्मण बंधुओं को जगाने वाली मेरी नयी कविता-

वेदों का ज्ञानी प्रकाण्ड
दर्पण है धर्म पुरातन का।
भारत की अस्मिता हेतु
उत्सर्ग किया निज जीवन का॥
धर्म-कर्म और सदा राष्ट्र-
सम्मान किया है ब्राह्मण ने।
देव-रक्षा हेतु निज अस्थि-
दान किया है ब्राह्मण ने॥
जब-जब कोई ललकार उठी
प्रतिकार किया है ब्राह्मण ने।
चाणक्य बना सत्ता पर घोर-
प्रहार किया है ब्राह्मण ने॥
मित्र सुदामा बनकर शापित-
चना चबाया ब्राह्मण ने।
तुलसीदास बन प्रभु की भक्ति
प्रेम सिखाया ब्राह्मण ने॥
राम राम थे परशुराम का
शौर्य दिखाया ब्राह्मण ने।
इतिहास देखिये चंद्रगुप्त-
श्रीमौर्य दिखाया ब्राह्मण ने॥
गजनी बाबर मुगलों से भी
रार लिया था ब्राह्मण ने।
धर्म-वेद रक्षा में जीवन
वार दिया था ब्राह्मण ने॥
किंतु आज के इस युग में
अपना इतिहास भुला बैठे।
कुछ कुल दीपक अंधियारों से
डरकर हाथ मिला बैठे॥
हम स्मरण करें अपनी शक्ति
गौरवशाली इतिहास पढ़ें।
वेद पढ़ें सब शास्त्र पढ़ें
नव परिवर्तन का भाष गढ़ें॥
संकल्पित हों हम राष्ट्रधर्म पर
भले प्राण देना होगा।
हम ज्ञानपुंज के दीप रहे
उसका प्रमाण देना होगा॥
वर्तमान से टकराने का
पुनः दम्भ भरना होगा।
एक बार फिर से ब्राह्मण को
परशुराम बनना होगा॥

-आशुतोष’आनंद’दुबे
09584642494

49 Total Views 3 Views Today

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Whatspp dwara kavita bhejne ke liye yahan click karein.