#Kavita by Ashutosh Anand Dubey

महान स्वतंत्रता सेनानी राष्ट्रवीर दुर्गादास राठौर जी की जयंती पर उनकी जीवनी पर आधारित कविता उन्हें ही समर्पित

भारत माता की छाती पर जब मुगलों के झंडे थे।
अच्छे अच्छे गर्म लहू वाले भी पड़ गये ठंडे थे॥

देशवासियों पर जब पूरा अंधकार सा छाया था।
आधे भारत की सीमा में मुगलों का ही साया था॥

तब मारवाड़ की धरती ने भारत को सच्चा वीर दिया।
मुगलों से जो लड़ पाए ऐसा पौरुष रणधीर दिया॥

महा पराक्रम त्याग शौर्य का जो सच्चा अनुयायी था।
हर हिन्दू का बेटा था वह हर बहिनों का भाई था॥

ना तो राजा किसी राज्य का ना ही सत्ताधारी था।
लेकिन हिन्दू सिंहासन की सच्ची पहरेदारी था॥

सेवक था वह मारवाड़ का पूरा भार उठाया था।
तभी सिंहासन अजीत सिंह का मुगलों से बच पाया था॥

औरंगजेब की कुटिल नीति को कूटनीति से तोड़ा था।
जिसने हर हिन्दू को हर हिन्दू भाई से जोड़ा था॥

हिन्दू रक्षा की खातिर अपना सबकुछ बलिदान किया।
युगों युगों तक याद रहे ऐसा पराक्रमी काम किया॥

महाराणा सा था प्रताप और शौर्य शिवाजी जैसा था।
कविता में क्या क्या बतलाऊँ राष्ट्रवीर वह कैसा था॥

बीस बरस तक घोड़े पर ही जिसका पूरा जीवन था।
घोड़े पर ही बचपन था और घोड़े पर ही यौवन था॥

घोड़े पर बैठे बैठे ही रोटी बनाया करते थे।
जब भी नींद लगी वो घोड़े पर सो जाया करते थे॥

शौर्य समर्पण त्याग और सेवा का वह पर्याय हुआ।
जिसके पौरुष पराक्रम से औरंगजेब मृतप्राय हुआ॥

दो धारी तलवार ढाल और एक हाथ में भाला था।
संघर्षमयी पूरा जीवन था कितना हिम्मतवाला था॥

मातृभूमि की रक्षा का जिसके सिर चढ़ा जुनून था।
क्षत्रिय कुल का गौरव था वह राजपूत का खून था॥

अपने शौर्य पराक्रम से वह भारत का सिरमौर हुआ।
शूरवीर वह राष्ट्रवीर वह दुर्गादास राठौर हुआ॥
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कवि आशुतोष’आनंद’दुबे
(छत्तीसगढ़, 09584642494)

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