#Kavita by Ashutosh Anand Dubey

रेयान स्कूल में मासूम की निर्मम हत्या की वीभत्सक हृदयविदारक घटना पर दु:ख व आक्रोश की मिलीजुली प्रतिक्रिया-

 

विद्या का मंदिर खूनी जल्लादों का बन घर बैठा

पता नहीं कब कहां कौन है कालसर्प बनकर बैठा।

 

चीत्कार कोहराम मचा है हर आँखों में नीर है

प्रिय मासूम प्रद्युमन का क्यों लहूलुहान शरीर है।

 

मां की आंखें रो रो कर पथराईं है

बार बार बाबू बेटा चिल्लाईं है।

 

पापा के आँखों में अंधियारा छाया

बदहवास कलेजा मुँह बाहर आया।

 

जिसने भी यह खबर सुनी उसकी भी सांसें ठहरी है

इस वीभत्सक दुर्घटना पर साजिश लगती गहरी है।

 

पिघल पिघल कर हृदय आंख से धारा बनके फूटा है

अभिभावक का आज भरोसा विद्यालय से टूटा है।

 

कलम रो रही शब्द शब्द में क्रंदन है

आज विधाता का भी निष्ठुर सा मन है।

 

जो कल का बनने वाला उजियारा था

मम्मी-पापा की आंखों का तारा था।

 

झटके में ही आसमान के उस तारे को तोड़ दिया

विद्यालय की असुरक्षा से बेटे ने जग छोड़ दिया।

 

ऐसे सारे जितने भी शिक्षा के गोरखधंधे हैं

जितने भी स्कूल प्रबंधन बनकर बैठे अंधे हैं।

 

इन सारे स्कूलों की प्रामाणिकता भी सिद्ध हो

अभिभावक भी इन स्कूलों के बिलकुल विरुद्ध हो।

 

चाटुकार हों शासन के या के कोई जयचंद हों

जिनके ऐसे स्कूल खुले हैं वे सारे ही बंद हों। आशुतोषआनंददुबे 09584642494, 7869120230

 

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