#Kavita by Ashutosh Anand Dubey

सत्य अहिंसा त्याग तपस्या धर्म हमारा सदा रहा है।

क्षमा मार्दव आर्जव संयम ब्रह्मचर्य उत्तमा कहा है॥

 

स्वच्छ आचरण उत्तम व्रत का हमने ही अनुसरण किया है।

महावीर मुनि और दिगंबर का हमने अनुकरण किया है॥

 

धरा गगन और अंतरिक्ष में शांति मंत्र के पालक हम है।

हम है जैन दिगंबर आत्मा-परमात्मा के साधक हम हैं॥

 

पर्यूषण का महापर्व है सत्संगति का शुभ अवसर है।

सामागम स्थल मंदिर है महावीर का अनुपम घर है॥

 

प्रभु की छाँया में आकर के शांति चेतना आ जाती है।

पाप नष्ट हो जाते हैं सब पुण्य साधना मन भाती है॥

 

मन भीतर सत्संग समर्पण होगा प्रभु के चरणों में।

तब महावीर प्रवेश करेंगे सबके अंत:करणों में॥

 

-आशुतोष’आनंद’दुबे

09584642494, 07869120230

 

265 Total Views 3 Views Today

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Whatspp dwara kavita bhejne ke liye yahan click karein.