#Kavita by Atul Balaghati

अपना- अपना राग सभी का
झूठे सब किरदार।
जमाना, नहीं है सच का यार।

सच्चाई का शोषण होता
बेमानी का पोषण होता
ईमानदारी का छीन रही है-
मक्कारी, अधिकार ।

करने वाले करते रहते
सोने वाले सोते रहते
श्रेय उन्हीं को मिलता है बस-
जो हैं चाटुकार ।

भोले कब तक ज़हर पिओगे
जग हित में कब तलक जिओगे
छीनों छल से तुम भी अमरित-
ये मोहिनी संसार।
जमाना, नहीं है सच का यार।

अतुल बालाघाटी
मध्यप्रदेश

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