#Kavita by Atul Kumar Shukla

प्यार मोहब्बत की सच्ची कविता।

 

दूर हुवे जब हम उनसे,

खुद रुक ना पाये रोने से।

उम्मीद मिलन का दूर हुआ,

समय भी मेरा पूर्ण हुआ।

मुझसे दूर वह कैसे रहेगी,

प्रेम वेदना कैसे सहेगी।

अब कहे हम क्या उससे?

दूर हुऐ जब हम उनसे,

खुद रुक ना पाये रोने से।

 

वह अब भी गेट खड़ी होगी,

पावे से टेक खड़ी होगी,

वह मुझे बुला रही होगी,

उसकी सोच यही होगी,

कुछ आज भी उनकी भूली होगी!

मान नही रही होगी-समझाने से।

दूर हुवे जब हम उनसे,

खुद रुक ना पाये रोने से।

 

वह तकिये पर तड़पन मे,

सारी रात बीताती होगी।

उसे गट की खटकन मे,

याद हमारी आती होगी।

वह रो कर आँसू पोछती होगी,

कब होगी भेट सोचती होगी।

वह एकान्त बैठती होगी,

और स्वयं को कोसती होगी-

दूर हुयी मै क्यो उनसे?

दूर हुआ जब मै उनसे,

खुद रुक ना पाया रोने से।

 

अतुल कुमार शुक्ल-

सिद्धार्थनगर(उत्तर प्रदेश)

शिक्षा-हिन्दी(एम ए)

9559834122

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