#Kavita by Atul Kumar Shukla

कविता—-

 

ओट तुम्हारा है बरबाद,

झूठ-मूठ का जिन्दाबाद।

 

उठ नही सकते हो तुम,

जहाँ कहीं भी गिर गये हो।

 

राजनीति करने को तुम तो,

नेता जी को मिल गये हो।

 

घूमो पीछे इनके,उनके,

कोई नही तुम्हारे साथ।

 

कितनी नारेबाजी कर लो,

कुछ भी नही तुम्हारे हाथ।

 

ओट तुम्हारा है बरबाद,

झूठ-मूठ का जिन्दाबाद।

 

अतुल कुमार शुक्ल

सिद्धार्थनगर(यू पी)

7408847229///

Leave a Reply

Your email address will not be published.