#Kavita by Avdghesh Kumar Avadh

तोड़ दिया किसने माला

जज़्बातों के सरस – सरोवर, पर किसने डाका डाला,
टूट गईं क्यों प्यार की लड़ियाँ तोड़ दिया किसने माला?

जिन रिश्तों को सींच, पूर्वजों ने गुलशन गुलजार किया,
आग लगाया उस चिराग ने,स्नेह लुटा जिसको पाला।

प्रात काल में बाल सूर्य को स्नेह अर्घ्य से सींचा था,
चला गया जब शाम हुई तो, आवारा बन गोपाला।

जिसके उलझे केशों को भी, फौरन ही सुलझाते थे,
उसने नेह तन्तु को लेकर, बुन डाला मकड़ी – जाला।

अवध चेतना में आओ रे, दुनिया बदल रही पल पल,
हाय! स्वार्थ के कुटिल दीमकों ने कर डाला घोटाला।

अवध

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