#Kavita by Avdhesh Kumar Avadh

पत्थरों से क्यों मुहब्बत कर रहे

 

दुश्मनों की है कमी तो क्या हुआ,

दोस्त दुश्मन की कमी को भर रहे।

 

चोर – डाकू   लूटकर  धन छोड़ते,

आज घर के बीच अक्सर मर रहे।

 

स्नेह की मीठी छुरी दिल में उतर,

काढ़  लेती  है  कलेजा  चीरकर –

 

अब सम्हल जाओ अरे नादां अवध,

पत्थरों से क्यों ममहब्बत कर रहे!

 

अवधेश कुमार ‘अवध’

9862744237

 

 

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