#Kavita by Avdhesh Kumar Avadh

संकल्प

 

निज बाहु पर करके भरोसा नाव खेना है ।

संकल्प को हर हाल में अंजाम देना है ।

चाहे पवन गर रोकना मिलकर समन्दर से –

बनकर अगस्त्य सिन्धु को भी सोख लेना है।।

 

बादल गिराकर बिजुलियाँ हमसे न टकराये ।

सूरज  हृदय  के  जोश  से बेनूर हो जाये ।

गर हौसला दिल में भरा हो लक्ष्य पाने का –

बनराज भी झुककर वनों में राह दिखलाये ।।

 

ज्वालामुखी की आग सीने में भरो वीरों ।

दुखियों के दारुण क्लेश को हँसकर हरो वीरों ।

सद्कर्म का दामन कभी ना छूटने पाये –

हर स्वप्न को साकार साहस से करो वीरों ।।

 

अवधेश कुमार ‘अवध’

मेघालय 8787573644

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