#Kavita by Avdhesh Kumar Avadh

दशहरा पर्व की शुभकामनाएँ

लोभ मोह राज छोड़ त्याग अपनाओ सभी,
तभी तो भरत – राम भाई कहलाओगे ।

सीता राम लखन ज्यों सिखलाओ पिछडों को,
तभी वनवासियों में धर्म को जगाओगे ।

सोने की ही लंका हो या राजा होवे रावण सा,
चलोगे अधर्म पे तो कुल को मिटाओगे ।

पर्व ये दशहरा है सोचने – विचारने का,
अवध जो बोओगे वैसा ही फल पाओगे ।।

अवधेश कुमार ‘अवध’

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