#Kavita by Avdhesh Kumar Avadh

पीत वसन रँग   चूनर  धानी l

ओढ़ चली प्रिय वसुधा रानी ll

देखत  रूप  गगन   हरसाये l

मिलन भाव उर भरकर आये ll

 

प्रेम भाव भरकर अंजलि में –

अम्बर करे निसार l

अवधपति !

आ जाओ इक बार ll

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वसुधा देख लगी सकुचाने l

पीत पात लग गये सुखाने ll

रजनी में शशि राग जगाये l

सूरज  टीका भाल सजाये ll

 

पतझड़ की ऋतु बनकर आई –

नींव नवल आधार l

अवधपति !

आ जाओ इक बार ll

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क्षितिज पार मिल भये सुखारे l

धरती – नभ  आपस  में  वारे ll

सूरज    चंदा     बने    बराती l

जैसे    दीया    के   सँग बाती ll

 

कण – कण में मंगल स्वर गूँजे –

वत्सल शुचिता प्यार l

अवधपति !

आ जाओ इक बार ll

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मधुमासी   बसंत   अलबेला l

अरमानों से   सुरभित  मेला ll

नूतन पल्लव कुसुमित डाली l

कोयल  कूक  रही मतवाली ll

 

नाचत मोर देख घन मोहित –

अकथ धरा श्रृंगार l

अवधपति !

आ जाओ इक बार ll

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मातु    शारदे    राजें  रसना l

सुर सप्तक सँग बाजे बजना ll

महुआ    बेर   आम  बौराये l

रति अनंग उर अगन जगाये ll

 

हे शिवशंकर हे नट नागर –

करो कृपा करतार l

अवधपति !

आ जाओ इक बार ll

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शरद शिशिर   बारात  समेटे l

शबनम – मोती ज्योति लपेटे ll

मुदित   जगत  नैसर्गिक शोभा l

अलि कलि रूप निहारत लोभा ll

 

सतरंगी चूनर ले आया –

ऋतु बसंत सुकुमार l

अवधपति !

आ जाओ इक बार ll

 

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