#Kavita by Avdhesh Kumar Avadh

प्रेम बनाम जरूरत

जब प्यार का पैमाना
हो जाए ताजमहल
और शाहजहाँ प्रेमी
प्रेमिका मुमताज महल
तो प्रेम कैसे पनपेगा –
सावित्री – सत्यवान में ?
देश के प्रति जवान में ?

यह प्रेम नहीं जरूरत है-
माली को फूल की
गुलाब को शूल की
मछली को पानी की
राजा को रानी की ।

सच्चा प्रेम यह कि-
प्रेम में सागर को
बाँध दिया पति ने
शिव के श्राप से
बजाया पति रति ने
प्रेम मे वचन पाला
खुद को मिटाकर
द्युत में हारकर भी
जीत लिया युद्ध में
एक मुट्ठी चावल पर
निसार किया राज को
ऐसी ही जरूरत है
प्रेमियों की आज को ।

अवधेश कुमार ‘अवध’
8787573644

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