#Kavita by Avdhesh Kumar Avadh

मद    माया   मत्सर   मनमानी l

असत असार क्षणिक हुलसानी ll

नेह  फूल   रगड़े   नित   काया l

अंत काल  सब  काम न आया ll

 

भक्ति भाव परहित श्रम सेवा –

सर्वोत्तम     आचार l

अवधपति !

आ जाओ इक बार ll

***

विजय  पराजय आये जाये l

सही राह   को  ही अपनायें ll

सब  कुछ   देख  रहे रघुराई l

निज कर से चलचित्र चलाई ll

 

विधि का लिखा समय के पट पर –

कर   बंदे   स्वीकार l

अवधपति !

आ जाओ इक बार ll

 

अवध⁠⁠⁠⁠

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