#Kavita By Avdhesh Kumar Avdhesh

यह भारत देश है मेरा।
ना सोने की बची चिरइया ना ही वृक्ष बसेरा।।
खादी के उजले वस्त्रों में है छलियों का डेरा।
खोकर के सब मोबाइल में लगा रहे हैं फेरा।।
मज़हब के बाजार गर्म हैं और ठगी का घेरा।
पुरखों की कुरबानी से आया था सुखद सवेरा।।
किसकी काली करतूतों से छाया मेघ घनेरा।
गूँगों की महफिल में सुनता कौन अवध का टेरा।।

डॉ. अवधेश कुमार अवध
मेघालय 8787573644

Leave a Reply

Your email address will not be published.