#Kavita by B Manjhi

संदेश

 

चलना समझ समझ के कांटे ही कांटे हैं

मिला मुसीबत जिसको कोई नहीं बांटे हैं |

 

निज को मिटा कर देखा, कोई न

मिला है

हर आदमी को देखा कहा, हर का गीला है |

 

संतान सुख सोचना दूर का नजारा है

जो मिला न कभी कहीं कोई किनारा है |

 

मुसीबत मानकर चलो, समंदर लांघ जाओगे

जवानी जिंदगी है जान लो यह मान जाओगे |

 

गीता ग्रंथ है ज्ञान की आदेश कृष्ण भगवान की |

 

बना है कृष्ण सारथी

तब अर्जुन बना महारथी |

 

दिल उसकी दरिया है जहाँ विश्वास क्षमा है

बढ़ाकर हौसला देखो हर मुश्किल कमा है |

 

माँझी मल्लाह नाव तीनों नाम है यश का

वार करता सबको देखा लो यही काम है उसका |

 

बी 0 माँझी

सिहोडीह कबीर ज्ञान मंदिर के पीछे, गिरिडीह ( झारखण्ड  )

पिन 815301

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