#Kavita by B S Guaniya

जाने कब बचपन बीत गया

इन चार किताबी बातों में…

 

वो दिन कितने मखमल थे

जब बारह महीने चंचल थे..

सावन भी अपने सगे जहां

इन चार किताबी बातों में…

 

ना याद रहा कुछ भूल गए

सरिता संग वो स्कूल गए..

बारहखड़ी और इमला-विमला

इन चार किताबी बातों में…

 

गिल्ली-डंडा छुपन-छुपाई

इंद्रधनुष की वो अंगड़ाई..

हँसना-रोना फिर चुप होना

इन चार किताबी बातों में…

 

नित गुड्डे-गुड़िया की बारातें

तख्ती और खड़िया की बातें..

दादीमाँ की हर एक कहानी

इन चार किताबी बातों में…

 

भागमभाग भरे हर पल ये

ना आज मेरा और ना कल ये..

कैसे वो बचपन बीत गया

इन चार किताबी बातों में….

BSGauniya

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One thought on “#Kavita by B S Guaniya

  • January 15, 2018 at 11:59 am
    Permalink

    बहुत ही उम्दा लिखा है सर आपने…

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