#Kavita by Babita Chaube

आप सभी को दिवाली कि हार्दिक शुभकामनाएं

 

 

हिन्द की बेटी हिन्द की मांटी  दीप बनाकर लाई है।।

घर द्वारे को रोशन करने कुछ दीप बना कर लाई है।।

 

यह मांटी आजाद भगत की ,यह माटी है वीरो की

लक्ष्मी बाई के शौर्य की गाथा,आल्हा ऊदल परिपाठी की

उस माटी के दीप बनाकर हिन्द की बेटी लाई है।।

 

भाव समर्पण के इसमे  मिलाकर, ,धरतीपुत्र की महनत है।

आसाओ की पूंजी लगाकर ,घर रोशन करने आई है।।

हिन्द वतन की माटी के दीप बनाकर लाई है।

 

जल यमुना गंगोत्री का ,सरयू गंगा का मिलाकरके

कर्मठता की अग्नि में ,इनको पका कर लाई है

दीप बनाकर लाई है

 

 

माता पिता और भाई बन्धु भी ,देख रहे घर मेरी राह

घर रोशन हो मेरा भी रखती हूं मैं यही  चाह

पेट की अग्नि बड़ी बिकट है ,पेट के खातिर आई है

 

लेलो दीप रोशन कर दो अपने संग मेरी देहरी।।

धूप में बचपन पका पका कर ,भाव सुमन भर लाई है

हिंदुस्तान की बेटी देखो दीप बनाकर लाई है।

 

बबिता चौबे शक्ति – दमोह

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