#Kavita by Babita Kumari

सोच

 

मोदीजी के काम को पंसद करनेवाले

मोदीभक्त कहलाने लगे,

जो कहते थे-

मदिंर जानेवाले नापाक् होते हैं,

अब वही मदिंर जाने लगे.

कथनीऔर करनी में विरोधाभास दिखता है,

अपशब्द सुनकर भी जो अडिग रहे,

वही नया इतिहास लिखता है.

इतिहास पलटकर देख लो-

जिसपर ज्यादा विश्वास करो,

वही विश्वासघात करता है,

तुम उगंली दो वह बाँह पकड़ता है.

पकड़ने को अब बचा ही क्या,

सबसे मजबूत पकड़ थी माँ के आँचल की,

अब वह भी छूटा जाता है

बूढ़े हो जाने पर

उसे भी बाहर निकाला जाता है.

निकालकर हम अपनी पहचान को,आत्मसम्मान को,

गैरों की सोच से पहचाने जाते हैं,

अब कहाँ “बबीता”लोगों को बूढ़े माँ-बाप भाते हैं!

 

बबीता कुमारी

समस्तीपुर,बिहार.

 

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