#Kavita by Babita Kumari

प्रकृति की पुकार

 

प्रकृति करे पुकार

न उजाड़ो-2

मेरा हरा-भरा संसार

प्रकृति करे पुकार.

वृक्ष कहे-न काटो मुझको

धरा कहे-न बाँटों मुझको

यही तो है तेरा आधार.

प्रकृति करे पुकार

न उजाड़ो -2

मेरा हरा-भरा संसार.

प्रकृति और पुरूष से

हुआ जग निर्माण

काहे करे पुरूष अभिमान

शुरू होता यहीं से

सब का परिवार.

प्रकृति करे पुकार

न उजाड़ो-2

मेरा हरा-भरा संसार.

अगर हो जाए-

सारी धरा स्त्री-वृक्ष विहीन

तो कल्पना करो

कैसी होगी!

प्रकृति का आकार

यही तो करे

सब का कल्याण.

प्रकृति करे पुकार

न उजाड़ो -2

मेरा हरा-भरा संसार

प्रकृति करे पुकार.

 

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