#Kavita by Bablu Kumar Rahi

प्रत्येक

 

प्रत्येक नयन में डूब कर देखों

तुम्हारी आकृति दिखाई देंगे

प्रत्येक वाणी की नाद सुनों

तुम्हारी ही वाणी सुनाई देंगे। 1

 

प्रत्येक हर्ष-लहर को देखों

तुम्हारी लुप्त-हर्ष दिखाई देंगे

प्रत्येक विषाद-सागर को छूओ

तुम्हारी ही बिम्ब दिखाई देंगे। 2

 

प्रत्येक झुग्गी-झोपरी,छू कर देखों

तुम्हारी महल कम,घर पाओगे

कोई अश्रु-निर्मित रोटी खा कर देखों

तुम्हारी ही घर की स्वाद पाओगे। 3

 

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