#Kavita by Balwant Bawala

संकेत है’

संकेत है कल की माताओं के जो सीन दिखते हैं

चलती हैं तो लोग तमाशबीन दिखते हैं

अंधाधुन्ध अनुकरण, जागरूकता का अभाव, फैसन की रेस

क्यों हो रहा ऐसा कारण यही तीन दिखते हैं

संकेत है कल की माताओं के जो सीन दिखते हैं

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तन से हो गया वसन कम पैर में लग गया ऊँचा डण्डा

नही है ये अपनी संस्कृति नही है ये अपना हथकण्डा

क्या यही थे हमारे मूल्य, आचरण और संस्कार

अब तो संस्कारों के सब मायने भी गमगीन दिखते हैं

संकेत है कल की माताओं के जो सीन दिखते हैं

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व्यथित हूँ नजारा आज ऐसा है तो कल कैसा होगा

या यूँ कह दूँ आधुनिक आदिमानव जैसा होगा

जहां लोक लाज कुछ नही सिर्फ पैसा होगा

चिंतनीय है जिम्मेदार भी इस मुद्दे पर दीन दिखते हैं

संकेत है कल की माताओं  के जो सीन दिखते हैं

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जरूरत है एक जागरूक करने वाले पक्ष की

जरूरत है परिवार समाज में एक अध्यक्ष की

जो समझाये भारतीय संस्कृति को दिलाये याद नारी पक्ष की

अन्यथा हालात वैसे ही हों जाएंगे जैसे पानी से निकले मीन दिखते हैं

संकेत है कल की माताओं के जो सीन दिखते हैं

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रचनाकार– कवि बलवन्त बावला

कोराँव ,इलाहाबाद(उ०प्र०)

मो.न. -7499926897

 

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