#Kavita by Beg Raj Kalwasia

बेटियों के सम्मान में लिखे मेरे सात दोहे

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बोझ नहीं हैं बेटियाँ, समझो सब ये बात ।

इनकी सब रक्षा करो, बढ़ने दो अनुपात ।।

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हत्या करके भ्रूण की, लेते हैं जो जान ।

वो नर हो सकते नहीं, जालिम हैं शैतान ।।

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तोड़ो अब सब रूढ़ियाँ, बेटी नहीं अछूत ।

पढ़ा लिखाकर कीजिये, इनके कर मजबूत ।।

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बेटा बेटी एक से, दोनों एक समान ।

आओ करना सीख लें, दोनों पर अभिमान ।।

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बेटे को तो हर घड़ी, कहते राजकुमार ।

बेटी को फिर क्यों नहीं, करते उतना प्यार ।।

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बेटी को सम्मान दो, सुनो सभी फरियाद ।

बेटी से घर स्वर्ग है, दुनिया है आबाद ।।

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बेटी को तालीम दो, भरने दो परवाज ।

उड़ने दो आकाश में, बनने दो सरताज ।।

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बेगराज कलवांसिया ‘ढूकड़ा’

ऐलनाबाद (हरियाणा)

 

 

 

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