#Kavita bh Jasveer Singh Haldhar

छंद -रात राम जी ये बोले
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रात राम जी ये बोले ,सपने में भेद खोले ,
कब तक तम्बू में करोगे मेरी आरती ।
मैं तो रोम रोम में हूँ ,धरा और व्योम में हूँ ,
मेरे नाम पर ही क्यों बट रही भारती ।।
देखता हूँ क्षण क्षण ,बसता हूँ कण कण ,
प्राण रूप जन गण ही तो मेरा सारथी ।
जब भी चुनाव आये , मेरा मुद्दा गरमाये ,
गंदी राजनीति देख सीता ताने मारती ।।
हलधर -9897346173

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