#Kavita by Binod Kumar

रक्षा बंधन👫पर कुण्डलियाँ

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राखी पर्व महान है,बहन लुटाती प्यार।

वह धागे से बांधती, रक्षा सूत्र अपार।

रक्षा सूत्र अपार, सजाकर सुन्दर थाली।

होते भाई प्रसन्न,लगे न जेब हो खाली।

कह बिनोद कविराय, दिखे बत्तीसी झाँखी।

खुले हृदय के द्वार, बहन जो बाँधे राखी।

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