#Kavita by Binod Kumar

जीतें नहीं हारिये

—-

मित्रों का तो मान कर,

नहीं अपमान कर।

भूल से भी उनसे न,

संबंध बिगारिये।

यही एक नाता सदा,

मानव बनाता खुद।

औरों का न दोष देख,

खुद को सुधारिये।

दिल में तो जरा झाँक,

उनके गुणों को आंक।

भूल चूक माफ़ कर,

उनको पुकारिये।

शब्द न करें प्रहार,

याद बस रहे प्यार।

मानना पड़ेगा लोहा,

जीतें नहीं हारिये।

Leave a Reply

Your email address will not be published.