#Kavita by Binod Kumar

कहीं भरोसा उठ न जाये😞

भ्रष्टाचारी मजे ले रहे,

हँस के चुस्की चाय से।

कहीं भरोसा उठ न जाये,

अब भारत में न्याय से।

जज लोया के केस में देखें,

मानवता भी रोती है।

सत्ता का आतंक है इतना,

अपनी गरिमा खोती है।

बड़े बड़े जज बिक जाते हैं,

देश में घृणित उपाय से।

कहीं भरोसा उठ न जाये,

अब भारत में न्याय से।

मरने पर भी कैसे लाश को,

उनके गाँव पहुँचाते हैं।

मृत्यु का एक रूप नया दे,

असली भेद छिपाते हैं।

कैसा लोकतंत्र है अपना,

डरते लोग कसाय से।

कहीं भरोसा उठ न जाये,

अब भारत में न्याय से।

देखें केस लालू जी का भी,

कहते चारा खाया था।

जिसने गरीब गुरबों को जगाकर,

अग्रिम पंक्ति में लाया था।

पर इस केस में और लोग थे,

निर्दोषी बन बच निकले।

जिन पर सत्ता मेहरवान हो,

कौन भला उनको कह ले।

कहीं रो रही भारत माता,

अपने घर अन्याय से।

कहीं भरोसा उठ न जाये

अब भारत में न्याय से।

बिनोद कुमार”हँसौड़ा” दरभंगा(बिहार)

 

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