#Kavita by Binod Kumar

विषय-अपनापन

विधा-दोहे

१ अपनापन व्यवहार में,अगर कहीं दिख जाय।

फिर तो मानो स्वर्ग ही,इस धरती पर आय।

२अपनापन दिखता नहीं,दिखता है अब घात।

मानवता को तज रहे, अब तो मानव जात।

३अपनापन भूलें नहीं,करें भूल को  माफ़।

मन का कचड़ा त्याग दें,हृदय बनायें साफ।

४अपनापन बढ़ता रहे,करिये सदा विचार।

नफरत जब दिल में बसे, वहाँ लुप्त हो प्यार।

५अपनापन वह चीज है,जिसमें दिखे लगाव।

नफरत वह दीवार है,सदा करे अलगाव।

बिनोद कुमार “हँसौड़ा”३०/०५/१८

दरभंगा(बिहार)

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