#Kavita by Binod Kumar

हास्य मनहरण घनाक्षरी

सुन ले भोले भंडारी,हम भी तेरे पुजारी।

सुने महादेव जरा,हम पे भी ध्यान दे।

 

कुबेर को दिये धन,हमसे होवें प्रसन्न।

हमको भी बंगला तो,एक आलिशान दे।

 

बीबी देना भोली भाली, संग में सुन्दर साली।

देखते ही दिल खिले,हम पे ही जान दे।

 

जायें ससुराल कभी,मिलके खिलाये सभी।

कभी न भगाये मुझे,ऐसा वरदान दे।

बिनोद कुमार “हँसौड़ा”दरभंगा(बिहार)

 

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