#Kavita by Bipin Giri

गंगा पुत्र सानंद

एक और भगीरथ शहीद हुआ आज हरिद्वार में
था आनंदित,सुगन्धित वो माँ गंगा की सेवा में
अविरलता की चाह थे वो मन में संजोये हुए
वो सदियों से पवित्र थी इतिहास उनका ऐसा था
पाप धोने की,मुक्ति देने की अविरल बहने की
आज दर-ब-दर माँ मैली होकर बहती है
उन्हीं को बचाने कलयुग का भगीरथ निकला था
क्या पता “सानंद” को आनंद नहीं होगा
उनका प्यारा सपना अब पूरा नहीं होगा
बीच राह में काल रास्ता रोके खड़ा होगा
गंगा माँ की सेवा में सानंद प्राण त्याग देगा
अब सानंद के खोने का अपमान हमें होगा
क्या पता था “मातृ-सदन”अंतिम पड़ाव उनका होगा
तुम तो “हरिद्वार” से” हरिद्वार”अब पहुंच हीं गए
सानंद तुम तो आसमां से उतरे हुए परिंदे थे
रुखसत के वक्त तुम हरिद्वार के बासिन्दे थे.
गिरि बिपिन

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