#Kavita bny Rifat Shaheen

सफ़र लफ़्ज़ों का करना मुझे

क्योंकि

क़लम तुम बन के आए हो

रक़म हर बात करनी है

मिटाना है नही कुछ भी

सजाना है तुम्हारे दिल के कागज़ पर

वो सब बातें

जो तुमने सौंप दी मुझको

जो तुमने बख्श दी मुझको

जो मेरी ज़िंदगी बन कर धड़कते हैं मेरे दिल मे

वो तेरे लफ्ज़ ही तो हैं

मुझे थी प्यास लफ़्ज़ों की

बहुत प्यासी थी रूह मेरी

तुम्हीं ने प्यास ये मेरी बुझाई आबे शीरीं से ,

निकाला है मुझे तन्हाई की गहरी असीरी से

सफ़र लफ़्ज़ों का करना है मुझे

क्योंकि

क़लम तुम बन के आए हो,

इसे अब ज़िद मेरी समझो ,

या मेरी बेखुदी समझो, ,

सफ़र लफ़्ज़ों का करना है मुझे,

क्योंकि कलम तुम बन के आये हो

 

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