#Kavita by Brij Vyas

———— लहर लहर जाती है ” !!

 

मौन भाव हैं हृदय हमारे , लाज ठहर जाती है !

गाँव की पगडंडी से यादें , दौड़  शहर जाती हैं !!

 

अब मुंडेर कागा ना बोले , हवा में हैं सन्देशे !

अधरों पर मुस्कानें जैसे , फहर फहर जाती है !!

 

छेड़छाड़ ना सखियों की हैं ,छेड़े तेरे तराने !

तन्हाई में छेड़ तेरी वह , लहर लहर जाती है !!

 

अमराई की छांव में झूले , आज कहाँ पड़ते हैं !

बदली बदली हवा यहां की , डगर डगर जाती है !!

 

खपरैलों से छनकर आती , धूप न मिले यहां है !

हर आँगन में खुशहाली पर , संवर संवर जाती है !!

 

भाग दौड़ ना आपा धापी , जीवन सरल सहज है !

शहरों की चमकीली रातें , नहीं नज़र आती हैं !!

 

चमक दमक से दूर खड़े हैं , बाहर भीतर सच है !

यहां जिंदगी धूप सी खिलती , ठहर ठहर जाती है !!

 

पैमाने सच के कायम हैं , अर्थ ना आड़े आता !

यहां रिवाजों में अल्हड़ता , गहर गहर जाती है !!

 

बृज व्यास

 

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