#Kavita by Brij Vyas

पल में अँखियाँ हँसी अगर तो ,

पल में अँखियाँ रोई !!

 

दूर कहीं खोया है मनवा ,

पीर कोई ना जाने !

जूझ रही जन्मों से हूं मैं ,

मिले न ठौर ठिकाने !

बहलाने को कितने आये ,

दर्द ना समझा कोई  !!

 

खुशबू के झोंके आये तो ,

पल में बहल गये !

दर्द हुआ कपूर अगर तो ,

हम भी सम्भल गये !

रोज़ उड़ाने भरते हैं हम ,

उम्मीदें जो ढोई !!

 

आसमान ने बांधा हमको ,

फैला दी जो बाँहें !

मां धरणी की गोदी में हम ,

खुद को खूब सराहें !

पवन झकोरे बने मित्र हैं ,

सुखदा कहाँ है बोई !!

 

आशाओं का दामन छूटे ,

कभी हाथ है आये !

कभी पराये लगते अपने ,

अपने हुए पराये !

हार यदि मिलनी मिल जाये ,

जीत से रार न होई !!

 

समय कभी बांधा करता है ,

बड़े जटिल बन्धन से !

कभी हृदय से गले लगाता ,

अभिषेकित चंदन से !

सब कुछ अंगीकार करें हम ,

मुस्कानें ना खोई !!

 

बृज व्यास

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