#Kavita by Brij Vyas

समय का ईशारा है ” !!

ये जो तेरी आंखें हैं , जीने का सहारा हैं !
प्यास है कि घटती नहीं , सावन का नज़ारा है !!

बगावत हुई जग से , पराये लगे अपने !
पलको पे आँसूं पले , स्वाद मिला खारा है !!

हसरतें जवां हो गई , सपने लगे पलने!
आज हो न हो अपना , कल तो हमारा है !!

जागीरें हैं बेनामी , चरित्तर हैं सब खोखले !
लुटे यहां जनधन है , वोट बस हमारा है !!

मीडिया नहीं है खरा , कमाई करे नित नयी !
मुद्दों को देना हवा , इसे लगे न्यारा है !!

गोलियां धमाके हैं , धुंआ धुंआ मौसम है !
संगीनों पे जां है टिकी , देश हमें प्यारा है !!

रंगों के मेले हैं , खुशबूओं के डेरे हैं !
घटा बनके बरसो तुम , समय का इशारा है !!

बृज व्यास

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