#Kavita by Brij Vyas

” फटा पुराना हमको दो ,
नया नया हम से ले लो ” !!

गली गली का फेरा है ,
द्वार द्वार पर टेरा है ।
गठरी है सिर कांधे पर ,
और धूप का डेरा है ।
मोल भाव जुबां मीठी ,
दिन भर खेल यही खेलो ।

दबा पेट दबे गाल हैं ,
चमचम सा हाथ माल है ।
पानी पी भूख मिटा लें ,
स्वाभिमान का सवाल है ।
कौन अब तरस खाए है –
दिन भर ही खुद को ठेलो ।।

राम राम कर दिन बीते ,
हैं सवाल सब अनचीते !
बोहनी हो जाये अच्छी ,
मिल जाएं हमें सुभीते !
उपरवाला है रहमदिल –
जितना मिले वही ले लो !!

बृज व्यास

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