#Kavita by Brij Vyas

– खुशियां सभी टिकी हैं ” !!

घूँघट में है छिपी हया तो , पलकें झुकी झुकी हैं !
पल पल दिल बैचेन धड़कता , साँसें यों रुकी हैं !!

गालों पर बिखरी गुलाल हैं , अधरों पर अगवानी !
रोम रोम में सिहरन जागी , अँखियाँ मुंदी मुंदी हैं !!

खिले कंवल हैं मची खलबली , ज्वार उठा यौवन का !
तन मन बेकाबू सा लगता , नज़रें द्वार टिकी हैं !!

नख शिख तक श्रृंगार किया है , दिल पर राज करेगें !
आज तुम्हारी आँखों में भी , चाहत वही दिखी है !!

सपने हैं परवान चढ़े अब , होगें सच लगता है !
समय की निगरानी बढ़ती है , हर पल लुकालुकी है !!

आज आवरण हटना ही है , इन्तज़ार है बाकी !
रात कटी है आधी ऊपर , हिम्मत नहीं डिगी है !!

लगे समर्पण का दिन जानो , अपना शेष रहा क्या !
तेरी हर मुस्कान पे सचमुच , खुशियां सभी टिकी हैं !!

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