#Kavita by Brij Vyas

— पल पल को महकाऊँ” !!

तेरे मन की भाषा जानूँ , खड़ी खड़ी मुस्काउं !
जुल्फों की जंजीर न बाँधूँ , आओ इसे लहराउं !!

कुन्दन कुन्दन देह सजी है , केसरिया है बाना !
चन्दन जैसी महकी साँसें , पल पल को महकाऊँ !!

रंग हीना का चढ़ा गज़ब है , हरएक मुझको टोके !
तेरी प्रीत हृदय बसी है , कैसे इसे जताऊं !!

गालों पर बिखरे गुलाब हैं , अधरों पर अगवानी !
हया हुई है आज हवा सी, खुद से ही शरमाऊं !!

नयनों में एक नशा चढ़ा है , पलकें बोझिल बोझिल !
हवा करे है अगर शरारत , बहकी बहकी जाऊं !!

कर्ण सुने पदचाप जरा सी , मन बेकल होता है !
वक्त यों ही काटे ना कटता , कैसे दिल बहलाऊँ !!

कदमताल होती है प्रतिपल , ऐसी एक हलचल है !
दरवाजे पर दस्तक पाकर , खुशी से मैं लहराउं !!

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