#Kavita by Brij Vyas

—– पल पल लगे ठहरते ” !!

 

ऐक झलक पाने को तरसे ,छिपे चाँद के जैसे !

गन्ध संदली कैसे भूलें , मधुवन को हम तरसे !!

 

खुशी खनकती , छन छन करती , बाहर हम घायल हैं !

इसीलिये तो यहां वहां है , तेरे मेरे चर्चे !!

 

हंसी दामिनी जैसी दमके , अलकें घटा सी छाइ !

छटा बिखेरो इंद्रधनुष सी , अँखियाँ पल पल हरषे !!

 

मदमाती सी गन्ध उड़ी है , सम्मोहन जागा है !

रात दिवस भी यहां थमे है , पल पल लगे ठहरते !!

 

तेरा जलवा मिले देखने , उम्मीदें कायम हैं !

गलियां गलियां भटक रहे हैं , तेरे आज शहर के !!

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