#Kavita by Brij Vyas

—— नया सिलसिला दिया ” !!

 

तुम हंस दिये अगर तो , चमन खिलखिला दिया !

बल खा के बढ़ चले  तो , नया सिलसिला दिया !!

 

थम सा गया है शोर , हवाओं का अब  यहां !

बिखरी हुई है मस्तियाँ  , जादू चला दिया !!

 

गुनगुनाते भंवरे भी , भटके हैं राह को !

जाम तुमने सबको , नशे का पिला दिया !!

 

मदमाती हुइ खुशियां , तन मन पे हैं सजी !

भूल नहीं पायेगें  , ऐसा सिला दिया !!

 

सब कुछ समेट कर ही , इठला रहे हो तुम !

धरती , गगन सभी को , तुमने हिला दिया !!

 

तुम जैसे और भी हैं , इसे भूलना नहीं !

हमने दिया है प्यार  , कोइ कम नहीं दिया !!

 

बृज व्यास

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