#Kavita by Brij Vyas

—— इनायत है बस ” !!

 

अँखियाँ तेरी कयामत हैं बस !

अँखियाँ तेरी नियामत हैं बस !!

 

हम तो यहां फकीर हुए हैं ,

ऐसी करी शरारत है बस !!

 

ठगी करे तो पलकें हंसती !

लिख दें नयी इबारत है बस !!

 

ख़्वाब सजे हैं मन्ज़िल मन्ज़िल !

ऐसी चुनी इमारत है बस !!

 

अधरों ने जो लिखी कहानी !

इन नयनों को भावत है बस !!

 

चंचल , शोख ,मदिर , मद गहरा !

आंखों बसी नज़ाकत है बस !!

 

मुस्कानों की धार बना दें !

इसमें इन्हें महारत है बस !!

 

ममता, करुणा , प्रीत , प्यार है !

मिले नयन से पावत हैं बस !!

 

मेहरबानियां तेरी काफी ,

अँखियाँ करे अदावत है बस !!

 

कहना सुनना सब भूले हैं ,

कर देती अनावृत है बस !!

 

चुटकी में हम जहां पा गये ,

नज़रों की इनायत है बस !!

 

बृज व्यास

 

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