#Kavita by Brij Vyas

” दिल यों लूट लिए जाते हो ”

 

तुम  गुलाब से मुस्काते हो !

दिल यों लूट लिए जाते हो !!

 

हम सब तुम पर वारी जायें !

ऐसे हाल किये जाते हो !!

 

अपनी दुनिया तुम तक सिमटी ,

मन बेहाल किये जाते हो !!

 

तुम बिन पल बेचैन लगे है !

ऐसी ठगी किये जाते हो !!

 

खुशियों की सौगातें दी हैं ,

यह एहसान किये जाते हो !!

 

घर आँगन दीवार सजाये ,

अवसर भेंट किये जाते हो !!

 

मनहारी तुम रूप धरे हो !

दिल का हरण किये जाते हो !

 

खिली खिली है रंगत ऐसी !

शोखी सभी लिये जाते हो !!

 

दीवाने से सब लगते हैं !

जी जंजाल किये जाते हो !!

 

फूलों की फुलवारी फीकी !

सारी महक लिये जाते हो !!

 

हम भी हुए फकीर जान लो !

खुशियां साथ लिये जाते हो !!

 

बृज व्यास

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