#Kavita by Brij Vyas

” तेरे सदके बहार आई है ” !!

 

मैंने जब जब भी चोंट खाइ है !

मां तेरी याद मुझको आइ है !!

 

तूने चलना सिखाया राहों पर ,

में जो सम्भला तू मुस्कराई  है !!

 

वो टपकना छतों का रातों को ,

तेरे दम पे ही सुबह पाइ है !!

 

भूखे रह के खिलाया जी भर है ,

तेरी रहमत तो करिश्माई है !!

 

खारे आंसू मिले बने मोती ,

तेरे सदके बहार आई है !!

 

मेरी चाहत हंसी रहे कायम ,

तू हँसे दुनिया मुस्कराई है !!

 

तेरा साया रहे सलामत बस ,

मेरे रब तुझसे आशनाइ है !!

 

बृज व्यास

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